एम.ए. राजस्थानी पाठ्यक्रम
राजस्थानी भासा री संवैधानिक मान्यता नै लेय'र लारलै बरसा मांय घणा कारज हुया है। उण कारजां मांय राजस्थानी री विधिवत भणाई रो पांवडो खास महताऊ है। राजस्थानी स्कूली भणाई सूं कटगी अर ओ इज कारण रैयो कै इण रो ग्यान स्कूली पढ़ाकां नै कमती होंवतो गयो। ओ तो भलो हुवै जण रो जकै राजस्थानी नैं जींवती राखी। जन जकी नै धारण कर लेवै उण नै कुण मिटा सकै। राजस्थानी भासा रै साथै जण रो हेत सरावण जोग है।
साथै ई सरावण जोग है राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड, अजमेर अर राजस्थान रा कैयी विश्वविद्यालय जका आपरै पाठयक्रम मांय राजस्थानी नै किणी न किणी भांत लागू कर राखी है। राजस्थानी नै माध्यमिक शिक्षा बोर्ड री दसवी क्लास मांय तीजी भासा रै रूप मांय ली जा सकै। इंयां ई 11वीं अर 12वीं मतळब जूनियर अर सीनियर आर्टस फैकल्टी मांय एक विसय रै रूप मांय राजस्थानी ली जा सकै।
रैयी बात विश्वविद्यालयां री तो राजस्थानी एक-आध विश्वविद्यालय नै छोड'र राजस्थान रै सगळै विश्वविद्यालयां (डीम्ड विश्वविद्यालयां मांय इज है) मांय भणाइजै।
जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय, जोधपुर राजस्थानी पेटै खास गढ़ मानीजै। महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय, अजमेर अर बीकानेर विश्वविद्यालय, बीकानेर ई आपरै पाठ्यक्रम मांय राजस्थानी नै भेळी राखी है।
इण सूं अळगा जनार्दनराय नागर मान्य विश्वविद्यालय, उदयपुर रो राजस्थानी भासा भणाई पेटै खास योगदान है।
इण विश्वविद्यालयां मांय बी.ए. रै एक विसय रै रूप मांय राजस्थानी भेळी है वठै ई एम .एम .राजस्थानी मांय करी जा सकै है। हरख री बात है कै एम ए हिन्दी रै एक पेपर रूप मांय ई राजस्थानी भासा ली जा सकै है।
बीकानेर विश्वविद्यालय, बीकानेर
बीकानेर विश्वविद्यालय, बीकानेर थरपणा सूं पैली इण रो छेतर महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय, अजमेर रै नीचै हो। इणी कारणै नुंवै विश्वविद्यालय (जगत पोसाळा) मांय पाठ्यक्रम ज्यूं रो त्यूं राखीज्यो।
बगत बायरै सारू कीं बदळाव जरूर करीज्या पण हाल ही घणा बदळाव हुवणा बाकी है।
हाल बीकानेर विश्वविद्यालय, बीकानेर (महाराजा गंगासिंह विश्वविद्यालय, बीकानेर) रै एम.ए. रै पाठ्यक्रम रो अठै जिक्र करां।
बीकानेर विश्वविद्यालय मांय एम.ए. पैली साल मांय 4 पेपर अर दूजै अर आखरी साल मांय 5 पेपर है। उणां मांय पाठ्यक्रम इण भांत है-
एम.ए.पूर्वार्द्ध-
1. आधुनिक राजस्थानी काव्य
इकाई—1 : वीर सतसई : सूर्यमल्ल मीसण
इकाई—2 : बादळी : चंद्रसिंह
इकाई—3 : राधा : सत्यप्रकाश जोशी
इकाई—4 : लीलटांस : कन्हैयालाल सेठिया
2. आधुनिक राजस्थानी गद्य
इकाई—1 : बुगचो : मूलदान देपावत
इकाई—2 : आज री राजस्थानी कहाणियां : संपादक— रावत सारस्वत, रामेश्वरदयालश्रीमाली
इकाई—3 : तास रो घर (नाटक) : यादवेन्द्र शर्मा चंद्र
इकाई—4 : मैवै रो रूंख(उपन्यास) : अन्नाराम सुदामा
3. राजस्थानी भाषा एवं साहित्य का इतिहास
इकाई—1 : भाषा एवं लिपि सामान्य सिद्धांत
इकाई—2 : राजस्थानी भाषा : उद्भव और विकास परंपरा
इकाई—3 : राजस्थानी साहित्य : आदिकाल
इकाई—4 : राजस्थानी साहित्य : मध्यकाल
इकाई—5 : राजस्थानी साहित्य : आधुनिक काल
4. राजस्थानी लोक साहित्य एवं संत साहित्य
इकाई—1 : लोक साहित्य : लोक एवं मानस: परिचय,परिभाषा, लोकतत्व
इकाई—2 : लोक साहित्य : सामान्य परिचय एवं वर्गीकरण
इकाई—3 : लोककथा, लोकगीत, लोकगाथा
इकाई—4 : राजस्थानी लोक देवी—देवता
इकाई—5 : राजस्थानी संत एवं संत संप्रदायों का सामान्य परिचय
इकाई—1 : वीर सतसई : सूर्यमल्ल मीसण
इकाई—2 : बादळी : चंद्रसिंह
इकाई—3 : राधा : सत्यप्रकाश जोशी
इकाई—4 : लीलटांस : कन्हैयालाल सेठिया
2. आधुनिक राजस्थानी गद्य
इकाई—1 : बुगचो : मूलदान देपावत
इकाई—2 : आज री राजस्थानी कहाणियां : संपादक— रावत सारस्वत, रामेश्वरदयालश्रीमाली
इकाई—3 : तास रो घर (नाटक) : यादवेन्द्र शर्मा चंद्र
इकाई—4 : मैवै रो रूंख(उपन्यास) : अन्नाराम सुदामा
3. राजस्थानी भाषा एवं साहित्य का इतिहास
इकाई—1 : भाषा एवं लिपि सामान्य सिद्धांत
इकाई—2 : राजस्थानी भाषा : उद्भव और विकास परंपरा
इकाई—3 : राजस्थानी साहित्य : आदिकाल
इकाई—4 : राजस्थानी साहित्य : मध्यकाल
इकाई—5 : राजस्थानी साहित्य : आधुनिक काल
4. राजस्थानी लोक साहित्य एवं संत साहित्य
इकाई—1 : लोक साहित्य : लोक एवं मानस: परिचय,परिभाषा, लोकतत्व
इकाई—2 : लोक साहित्य : सामान्य परिचय एवं वर्गीकरण
इकाई—3 : लोककथा, लोकगीत, लोकगाथा
इकाई—4 : राजस्थानी लोक देवी—देवता
इकाई—5 : राजस्थानी संत एवं संत संप्रदायों का सामान्य परिचय
एम.ए. उतरार्द्ध -
1. मध्यकालीन एवं प्राचीन राजस्थानी काव्य
इकाई—1 : रणमल्ल छंद : श्रीधर व्यास
इकाई—2 :हाला झाला रा कुण्डलिया : ईसरदास
इकाई—3 : वेलि किसण रूकमणी री : पृथ्वीराज राठौड़
इकाई—4 : मीरा वृहद् पदावली
2. मध्यकालीन एवं प्राचीन गद्य
इकाई—1 : अचलदास खींची री वचनिका
इकाई—2 : राजस्थानी साहित्य संग्रह
इकाई—3 : कुंवरसी सांखलो
इकाई—4 : जगदेव परमार री बात
3. काव्यशास्त्र एवं पाठालोचन
इकाई—1 : भारतीय एवं पाश्चात्य काव्यशास्त्रीय सिद्धांतों का अध्ययन (साहित्य का स्वरूप एवं विवेचन, भारतीय एवं पाश्चात्य दृष्टि, साहित्य के तत्व, काव्य की मूल प्रेरणा और प्रयोजन)
इकाई—2 : विभिन्न काव्यरूपों का अध्ययन(रस सिद्धांत : रस निष्पत्ति, साधारणीकर, अलंकार संप्रदाय, वक्रोक्ति सिद्धांत : स्वरूप और भेद, ध्वनि सिद्धांत : ध्वनि का अर्थ और भेद/
अरस्तू के काव्य सिद्धांत : अनुकृति सिद्धांत, विरेचन सिद्धांत एवं काव्यरूपों का विवेचन/ क्रोंचे का अभिव्यंजनावाद/ आई.ए. रिचर्डस के काव्य सिद्धांत : मूल्य सिद्धांत)
अरस्तू के काव्य सिद्धांत : अनुकृति सिद्धांत, विरेचन सिद्धांत एवं काव्यरूपों का विवेचन/ क्रोंचे का अभिव्यंजनावाद/ आई.ए. रिचर्डस के काव्य सिद्धांत : मूल्य सिद्धांत)
इकाई—3 : राजस्थानी काव्यशास्त्र और छंदशास्त्र का अध्ययन (राजस्थानी छंदशास्त्र का परिचय, अलंकार, काव्य दोष)
इकाई—4 : पाठालोचन के सिद्धांत एवं पाठ संपादन की प्रक्रिया का अध्ययन (पाठालोचन की परिभाषा, स्वरूप और सिद्धांत)
4. विशिष्ट साहित्यकार
ईसरदास बारहठ/ महाराजा चतुरसिंह/ गणेशलाल व्यास उस्ताद (कोई एक)
5.निबंध या लघु शोध प्रबंध -
नियमित विद्यार्थी जिनके पूर्वार्द्ध में 55 प्रतिशत से अधिक नंबर है, लघु शोध प्रबंध लिख सकते हैं। स्वयंपाठी एवं अन्य विद्यार्थियों के लिए एक विकल्प रखा गया है। 'निबंध' पेपर के रूप में। उनको इस पेपर में 'निबंध' लिखना होता है। पेपर में 10 निबंध दिये होते हैं, जिनमें से परीक्षार्थी को एक विषय पर निबंध लिखना होता है।
:::: प्रत्येक पेपर 100 अंक का होता है। उत्तीर्ण होने के लिए एक पेपर में कम से कम 20 अंक और कुल प्राप्ताकों का योग 36 प्रतिशत होना जरूरी है। 48 प्रतिशत से द्वितीय श्रेणी और 60 प्रतिशत से प्रथम श्रेणी प्राप्त होती है।
एम.ए. राजस्थानी फाइनल पैलो पेपर
इण पेपर रो नांव ''मध्यकालीन एवं प्राचीन राजस्थानी काव्य'' है। इण पेपर मांय चार पोथ्यां लागै। हरेक पोथी 25 अंक री हुवै अर इण भांत पेपर कुल 100 अंक रो हुवै। पेपर मांय कुल पांच प्रश्न हुवै, पैलै प्रश्न मांय हरेक पोथी सूं एक पद्यांश री व्याख्या करणी हुवै। हरेक व्याख्या रै अथवा मांय एक विकल्प और हुवै। एक व्याख्या 9 अंक री हुवै इण गत 4 व्याख्या 36 अंक री हुयी। बाकी चार प्रश्न चारूं पोथ्यां मांय सूं एक-एक हुवै। हरेक प्रश्न रै अथवा मांय एक विकल्प और हुवै। हरेक प्रश्न 16 अंक रो हुवै। इण भांत भणेसरी नै कुल 5 प्रश्न 100 अंक रा तीन घंटां मांय हल करणां हुवै।
चार पोथ्यां मांय रणमल्ल छंद, हाला झाला रा कुण्डलिया, वेलि किसण रूकमणी री, मीरा वृहद पदावली भेळी है।
लारलै बरसां रा पेपर देख्यां भणेसरयां रै कीं समझ मांय आ सकै-
बरस 2007
1. सप्रसंग व्याख्या करौ
1. सप्रसंग व्याख्या करौ
2. रणमल्ल छंद राजस्थानी साहित्य री दैदिप्यमान कृति है। उदाहरणां सूं सांगोपांग वरणन करो।
अथवा
रणमल्ल छंद री काव्यगत विशेषतावां रै साथै काव्य रचना रौ उद्देश्य बाबत आपरा विचार राखो।
3. 'वेलि क्रिसन रूकमणी री राजस्थान री मरजादा अर उजळी संस्कृति री अंजसजोग रचना है।' खुलासौ करौ।
अथवा
'वेलि क्रिसन रूकमणी री' रचना वेलि साहित्य में घण महताऊ ठौड़ है।' उदाहरणां सूं पुख्ता करावौ।
4. 'हाला झाला रा कुण्डलिया इतिहास अर काव्य साहित्य रो सुरंगो मेळ है।' प्रमाण साथै उजागर करौ।
अथवा
'वेलि क्रिसन रूकमणी री' रचना वेलि साहित्य में घण महताऊ ठौड़ है।' उदाहरणां सूं पुख्ता करावौ।
4. 'हाला झाला रा कुण्डलिया इतिहास अर काव्य साहित्य रो सुरंगो मेळ है।' प्रमाण साथै उजागर करौ।
अथवा
'हाला झाला रा कुण्डलिया' राजस्थानी वीरकाव्य री सरब-सिरै रचना है।' उदाहरणां सूं खुलासौ करौ।
5. 'मीरा रा पद लोक-जीवण में रच्या-पच्या अर लोक री बपौती है।' इणरा मूल कारणां माथै आपरा विचार राखो।
अथवा
मीरा रै पदां में भगत हिरदै रा भाव सहज ही संचरित हुया है।' इण कथन रो खुलासो करतां आपरा विचार उदाहरणां साथै उजागर करो।
बरस 2008
1. सप्रसंग व्याख्या करौ
1. सप्रसंग व्याख्या करौ
2. रणमल्ल छंद री भासा शैली माथै आपरा विचार प्रगट करौ।
अथवा
रणमल्ल छंद में इतिहास अर छंदा रौ सांगोपांग मेळ है।' इण कथन री व्याख्या करो।
3.वेलि क्रिसन रूकमणी री रै काव्य सौंदर्य नै उदाहरण सहित समझावौ।
अथवा
वेलि रै सिणगार में राजस्थान री संस्कृति रौ रूपाळौ दरसाव है।' इण कथन नै खुलासै समझावौ।
4. हाला झाला रा कुण्डलिया राजस्थान रै वीरकाव्य रौ अणमोल रतन है। इणनै सप्रमाण सिद्ध करौ।
अथवा
हाला झाला रा कुण्डलिया रै इतिहास पख माथै एक टिप्पणी लिखौ।
अथवा
वेलि रै सिणगार में राजस्थान री संस्कृति रौ रूपाळौ दरसाव है।' इण कथन नै खुलासै समझावौ।
4. हाला झाला रा कुण्डलिया राजस्थान रै वीरकाव्य रौ अणमोल रतन है। इणनै सप्रमाण सिद्ध करौ।
अथवा
हाला झाला रा कुण्डलिया रै इतिहास पख माथै एक टिप्पणी लिखौ।
5. मीरा री भक्ति भावना में सगुण-निर्गुण रौ भेद करणौ घणौ दोरौ है। इण कथन नै सिद्ध करौ।
अथवा
मीरां रै पदां री प्रमुख विशेषतावां उजागर करौ।
बरस 2009
1. सप्रसंग व्याख्या करौ
(क) मलिक मंत्र --------- इम बुल्लिउ।।
अथवा
बिबहर भरि----------धरणी तळि।।
(ख) मावित्र-मज्राद--------वाहळा वरि।।
अथवा
गवई करि-------कामोदणिय रूख।।
(ग) एकौ लाखां आंगमै-----------लाख दळ खावणौ।।
अथवा
सादूळौ आपा समौ------- गिणै आपा समौ।।
(घ) करम-गत टारे नांहि टरे------ विष से अमृत करै।।
अथवा
अब तो निभायां बनेगी----- पैज रखौ महाराज।।
1. सप्रसंग व्याख्या करौ
(क) मलिक मंत्र --------- इम बुल्लिउ।।
अथवा
बिबहर भरि----------धरणी तळि।।
(ख) मावित्र-मज्राद--------वाहळा वरि।।
अथवा
गवई करि-------कामोदणिय रूख।।
(ग) एकौ लाखां आंगमै-----------लाख दळ खावणौ।।
अथवा
सादूळौ आपा समौ------- गिणै आपा समौ।।
(घ) करम-गत टारे नांहि टरे------ विष से अमृत करै।।
अथवा
अब तो निभायां बनेगी----- पैज रखौ महाराज।।
2. 'रणमल्ल छंद राजस्थानी रो एक अनूठो ऐतिहासिक खंड काव्य है।' इण कथन नै सिद्ध करो।
अथवा
वीर रणमल्ल रै शौर्य अर चरित्र री विशेषतावां उजागर करौ।
3. 'वेलि क्रिसन रूकमणी' रै कलापख नै उदाहरण साथै समझावो।
अथवा
'वेलि' राजस्थानी रो सिरमौर काव्य क्यूं कहीजै? इण माथै आपरा विचार प्रगट करौ।
4. हाला झाला रा कुण्डलिया री भाषा-शैली माथै एक विस्तृत टिप्पणी लिखौ।
अथवा
हाला झाला रा कुण्डलिया री काव्यगत विशेषतावां नै सप्रमाण दरसावौ।
5. मीरा रै जीवन चरित्र माथै एक प्रामाणिक टिप्पणी लिखौ।
अथवा
मीरां री भक्ति साधना री प्रमुख विशेषतावां उदाहरण सहित समझावौ।
अथवा
'वेलि' राजस्थानी रो सिरमौर काव्य क्यूं कहीजै? इण माथै आपरा विचार प्रगट करौ।
4. हाला झाला रा कुण्डलिया री भाषा-शैली माथै एक विस्तृत टिप्पणी लिखौ।
अथवा
हाला झाला रा कुण्डलिया री काव्यगत विशेषतावां नै सप्रमाण दरसावौ।
5. मीरा रै जीवन चरित्र माथै एक प्रामाणिक टिप्पणी लिखौ।
अथवा
मीरां री भक्ति साधना री प्रमुख विशेषतावां उदाहरण सहित समझावौ।
एम.ए. फाइनल दूजौ पेपर
इण पेपर रो नांव ''मध्यकालीन एवं प्राचीन गद्य'' राखीज्यो है। इण मांय 'अचलदास खीची री वचनिका', 'राजस्थानी साहित्य संग्रह', 'कुंवरसी सांखलो', अर 'जगदेव परमार री वात' चार पोथ्यां भेळी है।
हरेक पोथी सूं एक सवाल आवै। हरेक सवाल रै अथवा मांय एक सवाल हुवै। इण गत एक पोथी मांय सूं दो सवाल आवै जिण मांय सूं परीक्षार्थी छांट'र एक सवाल करै।
हरेक सवाल 25 अंक रो हुवै। इण गत पूरो पेपर 100 अंक रो हुयो। जको तीन घंटां मांय हल करणो हुवै।
बीकानेर विश्वविद्यालय रा कीं लारली सालां रा पेपर-
2007
1. अचलदास खीची री वचनिका रौ आधार ऐतिहासिक है कै काल्पनिक ? प्रमाणां साथै आपरै मत नै पुख्ताऊ करावौ।
अथवा
''अचलदास खीची री वचनिका में वीर रस रै साथै वात्सल्य अर करूण रस रौ सांतरौ चितराम मंडीजियौ है अर ठौड़-ठौड़ सिवदास गाडण रै सामीं भगती रा एहलांण पण मिळै।'' इण कथन नै पठित पुस्तक सूं औपता उदाहरणां देवतां हुया समझावौ।
2. राजस्थानी वर्णक साहित्य रौ परिचय देवतां थंका 'खींचीं गंगेद नींबावतरो दो-पहरौ' री विशेषतावां रो उदाहरण सैंती खुलासौ करौ।
अथवा
'राजान राउत रो वात वणाव' गद्य रचना रै आधार पांण मध्यकालीन राजस्थानी सामंती जीवन री ओळखांण करावौ।3. कुंवरसी सांखळो रौ कथासार पेश करतां हुया कुंवरसी सांखळै री चारित्रिक विशेषतावां नै उदाहरणां सैती समझावौ।
अथवाकुंवरसी सांखळौ आख्यायिका नीं हुय'र एक लघु उपन्यास है।' इण कथन सूं आप कठै ताणी सहमत हो? खुलासौ करावौ।
4. आप जगदेव परमार री वात नै एतिहासिक रचना मानौ कै लोक रचना ? आपरै पड़ूतर नै तर्कां सागै समझावौ।
अथवा
जगदेव परमार री वात रै विविध रूपांतरां रौ उल्लेख करता थकां उण री विशेषतावां रो बरणाव करौ।
2008
1. अचलदास खीची री वचनिका रै काव्य-सौंदर्य नै उजागर करौ।
अथवा
वचनिका रै कथा नायक रौ चरित्र चित्रण करौ।
अथवा
वचनिका रै कथा नायक रौ चरित्र चित्रण करौ।
2. संग्रह मांय तत्कालीन समाज री सामंतवादी व्यवस्था रौ चित्रण मिलै। इण बात रौ सांगोपांग खुलासौ करौ।
अथवा
'आखड़ी' अर 'विरद' किणनै कैवै ? इणरौ खुलासौ करतां थकां 'रामदास वैरावत' री आखड़यां रौ वरणन करौ।3. कुंवरसी सांखलो री नायिका भारमल री चारित्रिक विशेषतावां बतावौ।
अथवा
कुंवरसी सांखलो री तात्विक समीक्षा करौ।
4. जगदेव परमार री वात रै आधार माथै जगदेव रै गुणां रो बखाण करो।
अथवा
राजस्थानी वातां री विशेषतावां रो बखाण करता थकां जगदेव परमार री वात री समीक्षा करौ।
2009
1. राजस्थानी वचनिका परम्परा रो परिचय देंवतां थकां 'अचलदास खीची री वचनिका' री विशेषतावां नै समझावौ।
अथवा
अचलदास खीची री वचनिका री साहित्यिक कूंत करतां थकां कृति रै इतिहासू आधार रो खुलासो करो।
2. 'राजान राउत रो वात वणाव' रै आधार माथै मध्यकालीन राजस्थानी गद्य री विशेषतावां री ओळखाण करावो।
अथवा
अचलदास खीची री वचनिका री साहित्यिक कूंत करतां थकां कृति रै इतिहासू आधार रो खुलासो करो।
2. 'राजान राउत रो वात वणाव' रै आधार माथै मध्यकालीन राजस्थानी गद्य री विशेषतावां री ओळखाण करावो।
अथवा
राजस्थानी वर्णक साहित्य रो परिचय देंवतां थकां 'खींची गंगेव नींबावत रो दो-पहरौ' री विशेषतावां रो उदाहरण सेती खुलासो करो।
3. कुंवरसी सांखलो रो कथासार लिखता थकां कुंवरसी सांखलै री चारित्रिक विशेषतावां नै उदाहरण-सेती समझावौ।
अथवा
कुंवरसी सांखलो रचना री साहित्यिक कूंत करो अर बतावो के आ रचना आख्यायिका है, का एक लघु उपन्यास ?
4. जगदेव परमार री वात रै आधार माथै मध्यकालीन राजस्थानी संस्कृति रो सरूप उजागर करौ।
अथवा
जगदेव परमार री वात नै इतिहासू रचना मानी जावै का लोक रचना ? आपरै पड़ूतर नै उदाहरण-सैती समझावौ।
एम.ए. फाइनल तीजौ पेपर
इण पेपर रो नांव 'काव्यशास्त्र अर पाठालोचन' है। इण मांय कुल पांच इकाई हुवै। हरेक इकाई सूं एक सवाल हुवै (अथवा मांय एक विकल्प दीरीजै)। हरेक सवाल 20 अंक रो हुवै, इण गत पेपर 100 अंक रो हुयो जको तीन घंटां मांय हल करणो पड़ै।
1. साहित्य शास्त्र, 2. भारतीय काव्य शास्त्र, 3. पाश्चात्य काव्यशास्त्र, 4. राजस्थानी काव्यशास्त्र, 5. पाठालोचन सिद्धांत अर प्रक्रिया इकाई बणै।
लारलै बरसां रा बीकानेर विश्वविद्यालय रा पेपर -
2012
2011
2010
2009
1. काव्य प्रयोजन नै समझावतां इण बाबत न्यारा-न्यारा आचार्या रा कांई मत रह्या है ? विगतवार समझावौ।
अथवा
कवि री प्रतिभा काव्य हेतु रो आधार कियां है ? ठोस आधारां सूं जुड़्यो जवाब लिखौ।
2. साधारणीकरण नै समझावतां न्यारा-न्यारा विद्वानां री टिप्पणियां नै मांड'र लिखौ।
अथवा
काव्य में अलंकारां री कांई भूमिका है ? अलकांरां नै काव्य रो आवश्यक अंग मान्यो जा सकै'क नीं ? समझावौ।
3. क्रोंचे रै अभिव्यंजनावाद री सरल व्याख्या करौ।
अथवा
अरस्तू रै अनुकरण सिद्धांत रो खुलासो करो।
4.राजस्थानी अलंकार 'वैण-सगाई' रो अरथ, परिभाषा, भेद समझावतां राजस्थानी काव्य-परम्परा में इणरै प्रयोग रो कांई महत्व रह्यो है ? खुली विवेचना करो।
अथवा
राजस्थानी काव्य शास्त्र रा किणी चार काव्य-दोषां रो उदाहरण साथै परिचय देवौ।
5. पाठोलचन पद्धति नै समझावतां इण बात रो खुलासो करो'क इण पद्धति सूं किण भांत मूल पाठ तक पूग्यो जा सकै ?
अथवा
'पाठ-संपादन एक संपूरण वैग्यानिक पद्धति है।' इण कथन री विगतवार व्याख्या करो।
2008
1. काव्य प्रयोजन रो कांई अर्थ है। इण संबंध में आचार्यां रा बतायोड़ा मतां रो विस्तार सूं विवेचन करो।
अथवा
साहित्य रै सरूप बाबत भारतीय अर पाश्चात्य आलोचकां रै मत री समीक्षा करो।
2. वक्रोक्ति रै सरूप नै समझावतां थकां इणरै प्रमुख भेदां रो उदाहरण साथै परिचै देवौ।
अथवा
ध्वनि मत री व्याख्या करतां थकां ध्वनि रा भेद-प्रभेद लिखौ।
3. अरस्तू रै विरेचन सिद्धांत री विवेचना करो।
अथवा
आई.ए. रिचर्डस रो मूल्य सिद्धांत कांई है ? इणनै विस्तार सूं विश्लेषित करौ।
4. राजस्थानी छंदशास्त्र रो परिर्च देवो अर बताओ के छंदां रो काव्य में काई महत्व है ?
अथवा
नीचै लिख्या काव्य-दोसां री परिभासा उदाहरण साथै लिखौ-
पांगलो, बहरो, अमंगल, निनंग।
5. पाठालोचन कांई है अर इण रै आधार माथै किणी पांडुलिपि री प्रामाणिकता री जांच किण तरै सूं करी जावै।
अथवा
पाठालोचन री प्रक्रिया नै समझाय'र लिखो।
2007
1. साहित्य री परिभाषा देंवतां थकां उणरै भेदां रो बरणन करौ।
अथवा
''जीवन रै प्रति साहित्य री दीठ साहित्य रो सरूप निर्धारित करै।'' इण कथन रौ खुलासौ करौ।
2. रस रो स्वरूप अर रस निष्पति री व्याख्या करौ।
अथवा
साधारणीकरण री परिभासा लिखतां थकां उणरी विस्तार सूं व्याख्या करो।
3. क्रोंचे रै अभिव्यंजनावाद रो खुलासो करो।
अथवा
अरस्तु रो अनुकरण सिद्धांत कांई है ? इण सिद्धांत रो काव्य मांय कांई महत्व है ?
4. राजस्थानी छंदशास्त्र रो परिचै देंवतां थकां राजस्थानी काव्य रा प्रमुख छंदां री ओळखांण करावो।
अथवा
काव्यदोष री परिभाषा देंवतां थकां 'छबकाळो', 'पांगळो', 'निनंग', 'बहरो' अर 'अमंगळ' काव्य दोष माथै खरी टीप लिखौ।
5. पाठालोचन रो अर्थ अर महत्व बताओ।
अथवा
पाठालोचन री विधि रो खुलासौ करौ।
एम.ए. फाइनल चौथौ पेपर
इण पेपर रो नांव 'विशिष्ट साहित्यकार' है। सलेबस (पाठ्यक्रम) मांय तीन साहित्यकारा राखीज्या है। महाराजा चतुरसिंह, ईसरदास बारहठ, जनकवि गणेशलाल व्यास उस्ताद। इणां मांय परीक्षार्थी नै एक साहित्यकार रो चयन करणो पड़ै।
पेपर मांय 5 सवाल हुवै। पैलो सवाल व्याख्या रो हुवै। पैलै सवाल मांय कुल 4 व्याख्या (अथवा मांय एक विकल्प) हुवै, हरेक व्याख्या 9 अंक री हुवै। इण गत ओ पैलो सवाल 36 अंक रो हुयो।
बाकी च्यारूं सवाल 16-16 अंक रा हुवै। इणगत पेपर 100 अंक रो हुवै। अवधि 3 घंटां हुवै।
बीकानेर विश्वविद्यालय रै इण पेपर मांय जनकवि गणेशलाल व्यास उस्ताद रै पेपर रा कीं नमूना अठै दीरीजै-
2007
1. सप्रसंग व्याख्या करौ-
2. जनकवि उस्ताद रै जीवण परिचै अर व्यक्तित्व री ओळखाण करावौ।
अथवा
उस्ताद रै जीवण चरित्र माथै एक समीक्षात्मक लेख लिखौ।
3. 'मैणत, मजूरी अर करसाण ई कवि रो इस्ट हो।' इण भाव री रचनावां नै आधार बणा'र उगति नै समझावौ।
अथवा
''उस्ताद भांत-भांत सूं अबूझ मानखां री आंख्यां चानणौ करयो।'' इण कथन नै सांगोपांग रूप सूं उजागर करौ।
4. ''आजादी रै बाग में जूंझार पसीनो पाजै रे'' आं ओळ्यां सूं कवि भारत री जनता नै कांई भुळावण देवणी चावै ? रचनावां रा दाखलां सूं खुलासौ करौ।
अथवा
''लोही सूं नदियां कर राती सूरानर न्हावै छै काती'' लोक संस्कृति अर लोक उदाहरणां सूं कवि सूरापै रा बखाण घणीई ठौड् माथै करया है। उदाहरणां सूं खुलासौ करौ।
5. 'अरजुण वाळी आंख रै ज्यूं' उस्ताद नै मानखै री दोवड़ी गुलामी टाळ कीं निजर नीं आयौ। कवि री रचनावां में अै भाव सुमर लखावै, उदाहरणां सूं समझावौ।
अथवा
गणेशलाल व्यास उस्ताद नै जनकवि रो दरजो क्यूं मिल्यौ ? कांई वै सांचै अरथ में एक जनकवि हा ? समझावौ कै आपरा विचार राखौ।
2008
1. सप्रसंग व्याख्या करौ-
(क) समदर तोलै झाळ कनातै...हाळां रा पण हाथ।।
अथवा
आ जनकवि री जुगवाणी.... समचै साच सुणांणी।।
(ख) बंदा हिम्मत री जय बोल.... भारी तोल।
अथवा
तन तगड़ौ भरी जवांनी..... नौबत बाजी।।
(ग)धमक धमक धम धुरै....जुड़ै किनारो।।
अथवा
जन जन रै मन हेत चाहीजै ... गंडक चीता।।
(घ) आ दुनिया जड़ सूं सड़गी.... जग नै मरवासी।
अथवा
अै जाय जठै जुग जावै.... हरजानो दयौ।।
अथवा
आ जनकवि री जुगवाणी.... समचै साच सुणांणी।।
(ख) बंदा हिम्मत री जय बोल.... भारी तोल।
अथवा
तन तगड़ौ भरी जवांनी..... नौबत बाजी।।
(ग)धमक धमक धम धुरै....जुड़ै किनारो।।
अथवा
जन जन रै मन हेत चाहीजै ... गंडक चीता।।
(घ) आ दुनिया जड़ सूं सड़गी.... जग नै मरवासी।
अथवा
अै जाय जठै जुग जावै.... हरजानो दयौ।।
2. उस्ताद कलम रा सिपाही हा। इण बात माथै एक लेख लिखौ।
अथवा
उस्ताद रै जीवण री अबखायां माथै लेख लिखौ।
3. 'उस्ताद रै सिरजण रौ सरोकार मानखो हो।' इण कथन री समीक्षा करो।
अथवा
'उस्ताद इंकलाब री आवाज रो कवि हो।' सिद्ध करो।
4. उस्ताद लोक रंग रा कवि है।'' इण कथन री समीक्षा करो।
अथवा
''उस्ताद री कविता व्यवस्था विरोध रै सुर सूं सरोबार है।'' इण कथन माथै एक लेख लिखो।
5. ''उस्ताद री कविता जुग री जनवांणी है।'' खुलासो करो।
अथवा
उस्ताद रै नारी जागरण बोध माथै एक लेख लिखो।
2009
1. सप्रसंग व्याख्या करो-
(क) क्रोड कंठ हुंकार करै----- भुज भेळप रो भांन है।
अथवा
नवै मिनख री निजरां आगै------कठण काम री जै बोलौ।
(ख) करमां री लकीरां नै कायर---------कुण मूरख परखासी।
अथवा
एलकार री चाल दुरंगी------- जुग पसवाड़ौ लीन्हौ।
(ग) बराबरी रौ आज जमांनौ.......साथियां जागण रौ दिन आयौ।
अथवा
सूतां सैंग पीढियां बीती--------बिरथा जावै छै जमारौ।
(घ) अरे मानखा, इण जुग-------- दो हाथ मजूरी-काम घणो, धरती धीणो है।
अथवा
ओ रे उरजण, डर मत भाई----- आ दीवट आगै ले जाही।
2. गणेशलाल व्यास उस्ताद सदा निबळां रो जस गायो।'' कवि री रचनावां री बानगी देंवतां थकां इण कथन रो सांच परतख करो।
अथवा
गणेशलाल व्यास रै काव्य री भाषायी दीठ सूं कूंत करो।
3. जनकवि री जुगवांणी कांई संदेस देवै ? जन-चेतना जगावण वाळा कवि रा भावां नै आपरै सबदां मांय लिखो।
अथवा
जनकवि गणेशलाल व्यास रै काव्य रो कांई उद्देश्य हो ? उदाहरणां रै समचै समझावौ।
4. ''उस्ताद री रचनावां मांय नारी -चेतना री भावना रा दरसण भी हुवै।'' इण कथन री साखी में जनकवि री नारी-चेतना री भावना जगावण वाळी रचनावां रो वरणन करो।
अथवा
उस्ताद री रचनावां मांय राजनीतिक दीठ रो खुलासो करो।
5. उस्ताद री कलम आजादी रै पछै किण सारू संघर्ष करयो ? उदाहरण देंवतां थकां समझावो।
अथवा
मैणत, मजूरी, करसण ई कवि उस्ताद रो इस्ट हो। किण भांत ? कवि री रचनावां समचै समझावो।
एम.ए. फाइनल पांचवौ पेपर
इण पेपर रो नांव ''निबंध'' है। पेपर मांय कुल 10 निबंध रा टॉपिक दीरीजै, जिण मांय सूं छांट'र परीक्षार्थी नै किणी एक टॉपिक माथै लगोलग 3 घंटां निबंध लिखणो पड़ै। इण निबंध रा पूरा 100 अंक हुवै।
बीकानेर विश्वविद्यालय रै लारलै सालां रै पेपरां रा कीं नमूना-
2007
1. राजस्थानी साहित्य रा रीति ग्रंथ
2. राजस्थानी काव्य में स्वतंत्रता री चेतना
3. राजस्थानी लोकसाहित्य में जीवण-दरसण
4. पृथ्वीराज राठौड़ : व्यक्तित्व अर कृर्तत्व
5. राजस्थानी साहित्य में रामकाव्य परम्परा
6. राजस्थानी लोक नाट्य : स्वरूप अर विकास
7. राजस्थानी प्रकृति काव्य परंपरा
8. राजस्थानी साहित्य री अमोलक धरोड़ : डींगळ गीत
9. मीरा रै काव्य में लोक चेतना
10. आधुनिक राजस्थानी गद्य री विकास परंपरा।
2008
1. दुरसा आढ़ा : व्यक्तित्व अर कृतित्व
2. रस री त्रिवेणी : क्रिसन रूकमणी री वेलि
3. मीरा री भक्ति साधना में माधुरी भाव
4. शेखावाटी रा संत अर वांरो साहित्य
5. राजस्थानी कीरत थंम चारण काव्य परम्परा
6. सांच रो साखीधर राजस्थानी वीसर काव्य
7. जन आंदोलन में आगीवांण राजस्थानी कवियां रो काव्य
8. आधुनिक राजस्थानी साहित्य रो इतिहास
9. रासो परम्परा में 'राम रासो' री महताऊ ठौड़
10. राजस्थानी ओखाणां में जीवन प्रसंग।
2009
1. आज रो राजस्थानी साहित्य : दसा अर दिसा
2. राजस्थानी साहित्य में वीर नारी भावना
3. राजस्थानी साहित्य में जन चेतना रा सुर
4. राजस्थानी काव्य में प्रकृति चित्रण
5. राजस्थानी भासा रो सुवरण काळ (मध्यकाळ)
6. राजस्थान रा संत अर वांरी भक्ति साधना
7. राजस्थानी लोक साहित्य अर सामाजिक रीति-रिवाज
8. राजस्थानी री वेलि काव्य परम्परा
9. राजस्थानी काव्य में सिणगार रस
10. राजस्थानी री नीति साहित्य परंपरा अर संस्कृति।
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